आरती श्रीजिनराज तिहारी, करमदलन संतन हितकारी
सुर-नर- असुर करत तुम सेवा, तुम ही सब देवन के देवा ॥
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
पंच महाव्रत दुद्धर धारे, राग द्वेष परिणाम विदारे ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
भव-भय-मीत शरण जे आये, ते परमारथ- पंथ लगाये ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
जो तुम नाम जपै मन मांही , जनम-मरन-भय ताको नाहीं ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
समवशरण-संपूरण शोभा , जीते क्रोध-मान-छल-लोभा ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
तुम गुण हम कैसे करे गावैं , गणधर कहत पार न पावैं ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥
करूणा सागर करूणा कीजे, द्यानत सेवक को सुख दीजे ।
आरती श्रीजिनराज तिहारी.......॥